कर्म क्या हैं हमारे हिन्दू ग्रंथो मे हमें कर्मो के बारे मे बचपन से ही पढ़ने को बहोत कुछ मिलता हैं खाश कर के हमारे हिन्दू धर्म मे कर्म का महत्व बहोत हैं हमारे श्री मध् भागवत गीता मे श्री कृष्णा भगवान ने कहा हैं कर्मण्येवाधिकारस्ते फलषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकमज़्णि ll कर्म तेरे अधिकार मे केवल कर्म किए जा तू कर्म किए जा, फल की इक्छा त्याग के अर्जुन पालन अपना धर्म किए जा, किस इस्थिति मे क्या धर्म हैं तेरा ज्ञात तू इसका मर्म किए जा, तेरे लिए जो धर्म हैं निश्चित निष्ठा से ओ कर्म किए जा, अपने अपने कर्म का सब के लिए विधान जग मे कर्म प्रधान हैं, जग हैं कर्म प्रधान, अ कर्मडयता श्राप हैं कर्म योग वरदान कर्म किए बिन प्रणाी मृतक सामान, प्रणाी मृतक सामान,, तो अर्जुन कहते हैं यदि प्रारब्ध, द ही सबकुछ हैं तो कर्म की अवसक्ता क्या, हैं कर्म बिना प्रारब्ध ना बनता इस लिए कर्म विधान बना हैं,, अर्जुन फल पर यदि अधिकार नहीं तो कर्म का पौधा क्यो बोना हैं, कृष्ण,, कर्मों की प्राप्ति हे अर्जुन जन्मो का लेखा झोखा हैं, ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,...
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